Jun 22, 2013

दन्तेवाड़ा वाणी: "किस हसरत से आदिवासी इसे अपना देश मानें ?"

''हम इन सामग्रियों को लेने जाना तो चाहते हैं, परन्तु नेलसनार एवं कासोली शिविरों में वास कर रहे हमारे एवं आसपास के ग्रामों के निवासी नदी पार नहीं करने देते हैं एवं यदि कोई इस प्रकार का प्रयास करता है तो उसे पीट-पीटकर बेदम कर दिया जाता है और शिविर में ले जाकर पटक दिया जाता है व उसे वापस आने नहीं दिया जाता है। कभी-कभी उनका कत्ल भी कर दिया जाता है। ऐसे अनेक कत्ल सलवा जुडुम, विशेष पुलिस अधिकारी एवं सुरक्षा कर्मियों के द्वारा किये गये हैं।'' जब हमने उन वृध्दों से जंगल की ओर भाग खड़े हुए औरतों एवं बच्चों के विषय में पूछा तो बताया कि वे कासोली शिविर से वापस भाग कर आए हुए हैं एवं नदी पार से कोई भी व्यक्ति आता है तो हम सभी भाग खड़े होते हैं, क्योंकि वह सलवा जुडुम या सुरक्षा कर्मियों से संबंधित हो सकता है और यदि कोई भी व्यक्ति उन लोगों के हाथ में आता है तो वे उसकी बुरी तरह से पिटाई करते हैं एवं शिविर में लेकर चले जाते हैं। वे सभी अब शिविर में वापस नहीं जाना चाहते हैं, इसीलिए डरकर भाग जाते हैं
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