Nov 5, 2013

संचार क्रांति और आदिवासी समाज

बलभद्र बिरूवा Shared -

संचार क्रांति और आदिवासी समाज (Parody of Information Revolution and Tribal Society)

भारत वर्ष में नवीन संचार क्रांतिकारी की शुरुवात टेलीफ़ोन और मोबाइल फ़ोन के साथ हुई । आज पृथ्वी से निश्चित दुरी पर चक्कर लगाते हुए उपग्रहों की मदद से चलयमान हवाई या पानी जहाज की स्थिती जान सकते हैं, 1975 से अब तक भारत करीब 71 उपग्रह अंतरिछ में छोड़ चूका है, बिश्व के कई देश भी अपनी उपग्रह सेवा भारत से आयात कर रहे हैं । सूचना की महता को जान कर भारत सरकार ने Right to Information Act - 2005 पास किया जिसके तहत, कुछ देश की अतंरिक सुरक्षा के मामलों को छोड़कर सारी सुचना आम नागरिक ले सकता है । पूरी दुनिया की पल पल खबर हमें टेलीविजन से मिलती है । युद्ध जैसी स्थिति आ जाने पर भी भारत - पाकिस्तान संचार स्थापित कर शान्तिपूर्ण तरीकों से हल निकालने की कोशीश करते हैं ।

संचार व्यवस्था में क्रातिकारी परिवर्तन होने के बावजूद आदिवासी समाज में इसका बहुत ही सीमित असर पड़ा है, जबकि आदिवासी समाज, भारत का एक छोटा हिस्सा / परिवार है, तो इसमें संचार की गति काफी तीव्र होनी चाहिए ।

पूवर्जो दवरा स्थापित परम्परा, भाषा, सस्कृति का संचार अभिभावको से अपने संतानो की ओर नहीं हो रहा है, नयी पीढ़ी अपने समाज के प्रति दिगभ्रमित है । शहरीकरण से जहां संचार व्यवस्था सुधारनी चाहिए, लेकिन यहाँ गावं और शहर के बीच की खाई बढ़ती जा रही है । संचार क्रांति से शादी जैसे सामाजिक क्रिया कलाप भी अप्रभावित हैं, अभिभावको- संतानो, इच्छुक लड़के लड़कियो के बीच भी उचित सही रूप से संचार हो पायी है, समास्याये ज्यो का त्यो हैं । इन सबके बीच सूचनाए सही रूप में वितरीत नहीं हो पा रही है ।

इस तरह हम पाते हैं की संचार क्रांति ने आदिवासी समाज को वांछित रूप से प्रभावित नहीं किया है ।

संचार क्रांति और आदिवासी समाज (Parody of Information Revolution and Tribal Society) <br /><br />भारत वर्ष में नवीन संचार क्रांतिकारी की शुरुवात टेलीफ़ोन और मोबाइल फ़ोन के साथ हुई । आज पृथ्वी से निश्चित दुरी पर चक्कर लगाते हुए उपग्रहों की मदद से चलयमान हवाई या पानी जहाज की स्थिती जान सकते हैं, 1975 से अब तक भारत करीब 71 उपग्रह अंतरिछ में छोड़ चूका है, बिश्व के कई देश भी अपनी उपग्रह सेवा भारत से आयात कर रहे हैं । सूचना की महता को जान कर भारत सरकार ने Right to Information Act - 2005 पास किया जिसके तहत, कुछ देश की अतंरिक सुरक्षा के मामलों को छोड़कर सारी सुचना आम नागरिक ले सकता है । पूरी दुनिया की पल पल खबर हमें टेलीविजन से मिलती है । युद्ध जैसी स्थिति आ जाने पर भी भारत - पाकिस्तान संचार स्थापित कर शान्तिपूर्ण तरीकों से हल निकालने की कोशीश करते हैं । <br /><br />संचार व्यवस्था में क्रातिकारी परिवर्तन होने के बावजूद हो' (आदिवासी) समाज में इसका बहुत ही सीमित असर पड़ा है, जबकि आदिवासी समाज, भारत का एक छोटा हिस्सा / परिवार है, तो इसमें संचार की गति काफी तीव्र होनी चाहिए ।<br /><br />पूवर्जो दवरा स्थापित परम्परा, भाषा, सस्कृति का संचार अभिभावको से अपने संतानो की ओर नहीं हो रहा है, नयी पीढ़ी अपने समाज के प्रति दिगभ्रमित है । शहरीकरण से जहां संचार व्यवस्था सुधारनी चाहिए, लेकिन यहाँ गावं और शहर के बीच की खाई बढ़ती जा रही है । संचार क्रांति से शादी जैसे सामाजिक क्रिया कलाप भी अप्रभावित हैं, अभिभावको- संतानो, इच्छुक लड़के लड़कियो के बीच भी उचित सही रूप से संचार हो पायी है, समास्याये ज्यो का त्यो हैं । इन सबके बीच सूचनाए सही रूप में वितरीत नहीं हो पा रही है । <br /><br />इस तरह हम पाते हैं की संचार क्रांति ने आदिवासी समाज को वांछित रूप से प्रभावित नहीं किया है ।

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