Mar 8, 2016

Tribal Headlines Feed 16030801

Times of India
Imphal: Joining hands ahead of elections in some northeastern states, the left parties have called for unity among themselves to stamp out corruption ...
Hindustan Times
Some of India's Maoist strongholds may witness a different kind of revolution when the government kicks off a pilot project on rural transport to be ...

Times of India
... in Rayagada alleged that Mondo was not a Maoist and the security personnel killed him in a fake encounter to create panic among the tribals.

The Hindu

The Forest Department has joined hands with Coir Board, and an NGO in Udumlapet, to train women in Karattupathi tribal settlement in the district to make value-added products from coir, and coconut shell.


Times of India
... Dadu was bit on his right leg. The brothers scream for help alerted the other villagers who rushed to help them. The brothers screams of spotting the leopard saw villagers step out with iron rods and bamboo sticks.


The Indian Express
Chamru is an Asur, a 'particularly vulnerable tribal group' that dominates Sakhuapani's population of about 2,000 and lives in villages spread over a radius of 10 to 20 km

संचार क्रांति से जुड़ेंगे आदिवासी गांव

दैनिक जागरण

श्रावस्ती : इंटरनेट व मोबाइल का नेटवर्क न होने से आधुनिक संचार युग में भी सिरसिया विकास क्षेत्र के आदिवासी थारू बहुल्य भचकाही, मोतीपुरकला, रनियापुर समेत कई गांव देश-दुनिया से कटे हुए हैं। टावर न होने से यहां मोबाइल फोन खिलौना बने रहते हैं। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत गांव में टावर लगने की स्वीकृति मिलते ही यहां के लोग खुशी से झूम उठे। विकास क्षेत्र के भचकाही, रनियापुर, मोतीपुर कला, रवलपुर व बनकटी व अन्य थारू गांवों की आबादी हजारों में है। इन गांवों के आसपास किसी भी मोबाइल कंपनी का टावर नहीं लगा है। नेटवर्क की समस्या के चलते गांव में न तो इंटरनेट की सेवाएं मिल ...


आदिवासी जमीन पर 1969 के बाद मुआवजा अवैध : महासभा

प्रभात खबर
रांची. आदिवासी सरना महासभा ने कहा कि सीएनटी एक्ट की धारा 71- ए के अनुसार 1969 के बाद जमीन के किसी अंतरण को वैध बनाने का कोई प्रावधान नहीं है. विधायक चमरा लिंडा ने (कहा था कि 1969 से 1999 तक आदिवासी जमीन का मुआवजा वैध है) लोगों को भ्रमित किया है़. राज्य गठन के बाद आदिवासी जमीनों के अवैध हस्तांतरण के खिलाफ आदिवासी सरना महासभा 14 मार्च को राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार मंत्री के आवास का घेराव करेगी़ महासभा के संयोजक, पूर्व मंत्री देवकुमार धान, शिवा कच्छप, वीरेंद्र भगत व बुधवा उरांव ने सोमवार को होटल संगम गार्डेन,माेरहाबादी में प्रेस वार्ता में कहा कि सीएनटी एक्ट ..


दो साल में ही खंडहर हो गया आदिवासी का कुटीर

दैनिक भास्कर
क्षेत्र के ताडखेड़ा गांव में आदिवासियों के लिए बनी कुटीर महज दो साल में ही बद से बदतर होकर खंडहरों में तब्दील होने लगी है। स्थिति यह है कि कुटीरों में न तो छत बची है और न ही दीवारों में दरवाजे व खिड़कियां ही बचे हैं। इतना ही नहीं चबूतरा और सीमेंट कांक्रीट सड़क भी उखड़कर गायब हो गई है। हैंडपंप भी खराब पड़ा है। दरअसल सिरसी ग्राम पंचायत के ताडखेड़ा गांव में वर्ष 2012-13 में 25 लाख की लागत से आदिवासियों परिवारों के लिए आवासीय कुटीरों का निर्माण कराया गया था। पंचायत द्वारा निर्मित इन 25 कुटीर का काम बेहद घटिया स्तर से हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो कुटीर तय समय ..


निर्णय: आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की बैठक में बोले प्रेमचंद मुरमू, पी-पेसा के उल्लंघन से हो रहा आदिवासियों का अहित

प्रभात खबर
रांची: झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पी-पेसा कानून का उल्लंघन कर आदिवासियोंकी परंपरा, भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज व अर्थव्यवस्था पर कुठाराघात किया जा रहा है़ छठी अनुसूची के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था नहीं करने और गलत तरीके से नगरपालिका/ नगर निगम के गठन के कारण उनकी जमीन लुट रही है़ वे अपने ही क्षेत्र में अल्पसंख्यक बन रहे हैं. उक्त बातें आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष प्रेमचंद मुरमू ने कही़ वे रविवार को होटल अशोक में केंद्रीय कानून पेसा, 1996 की धारा 4(ओ) और धारा 4(एम) के क्रियान्वयन पर आयोजित मंच की बैठक में बोल रहे थे़. इस मौके पर कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन ...

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